भारत और चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है. सिक्किम के डोकलाम सीमा पर दोनों देशो की सेना आमने-सामने है. चीन बार बार भारत को सीमा से हटने के लिए धमकी दे रहा है. वहीँ चीनी मीडिया भारत को लेकर अलग – अलग बयान जारी कर रही है. चीन भारत को 1962 के युद्ध की याद दिलाते हुए जहर उगल रहा है लेकिन वह भूल रहा है भारत उसकी किसी धमकी से डरने वाला नहीं है.

चीन शायद भूल रहा है कि इस बार भारत पीएम मोदी के हाथों में है. चीन की यह गीदड़ भरी धमकियां कुछ काम नहीं कर रही है. चीन की यह हरकत देखते हुए मोदी सरकार ने एक कड़ा फैसला लिया है. भारत ने 6 विशालकाय हेलीकाप्टर खरीदने को मंजूरी दे दी है. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार 17 अगस्त को अमेरिका से 6 विशालकाय बोइंग AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की खरीद की मंजूरी को हरी झंडी दे दी है.

आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय की सबसे अहम संस्था यानी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस 4168 करोड़ रूपये की योजना को मंज़ूरी दे दी है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि भारतीय सेना ने इस योजना के लिए रक्षा मंत्रालय से सिफारिश की थी जिसे अब मंजूरी दे दी गयी है. सेना ने 11 अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए यह अनुरोध किया था. जिसमें रक्षा मंत्रालय की वित्तीय समिति ने सेना के लिए 6 हेलीकाप्टर खरीदने की मंजूरी दी है.

इस फैसले से चीन के होश उड़ सकते है. मोदी सरकार द्वारा मिली इस मंजूरी से भारतीय सेना बहुत मजबूत होगी. मोदी सरकार भारत की सैन्य शक्ति मजबूत करने के लिए नये-नये आधुनिक हथियारों की खरीद को मंजूरी दे रही है. आपकी जानकारी को बता दें कि इससे पहले सितम्बर 2015 में रक्षा मंत्रालय ने 2.2 अरब डॉलर के 22 अपाचे हेलीकाप्टर खरीदने की योजना को मंजूरी दी थी.

मोदी सरकार के इस फैसले से वायु सेना को बहुत फायदा होगा. वायु सेना कि योजना इस अटैकर हेलीकॉप्टर की तैनाती पाकिस्तान और चीन की सीमा पर करने की है. वायु सेना के अपाचे की तैनाती से पाकिस्तान और चीन मोर्चे पर भारत को और भी मजबूती मिलेगी.

साथ ही भारत इन हेलीकाप्टर के साथ साथ अमेरिका से प्रशिक्षण गोला बारूद स्पेयर पार्ट्स भी लेगा. आपको बता दें कि यह हेलीकॉप्टर इतने शक्तिशाली होंगे कि इनमें लगे सेंसर की मदद से यह हेलीकॉप्टर रात में भी उड़ने में सक्षम होगा.

बता दें कि यह ऐसा हेलिकॉप्टर है जिसे दुनिया में सबसे ज्यादा अटैक करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इस हेलिकॉप्टर ने सबसे पहली उड़ान 30 सितम्बर 1975 में भरी थी. भारतीय सेना को यह मदद मिलने के बाद दुश्मनों को सबक सिखाने में भारत सक्षम होगा.