जब से पीएम मोदी सत्ता में आये है तब से भारत को बेहतर बनाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाये जा रहे है. भारत को उचाईयों पर देखना जैसे पीएम मोदी का ख्वाब हो. डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है. पीएम मोदी का मानना है कि डिजिटल इंडिया की मदद से भारत को एक उम्दा देश बनाया जायेगा.

लेकिन विपक्ष ने हमेशा मोदी सरकार को घरने की कोशिश की है. जिसमें वो अक्सर असफल रहे है. विपक्ष ने पीएम मोदी के इन प्रोजेक्ट्स को भी बेकार करार दिया था. ये सवाल भी उठाये गए कि पीएम मोदी का डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट सफल रहा भी या नहीं. कुछ शिकायतें ये भी सामने आयीं कि पीएम मोदी ने इन 3 सालों में भारत को डिजिटल बनाने में असफल रहे.

लेकिन आज एक ऐसा डाटा सामने आया है जिसे देखकर पीएम मोदी के विरोधियों का मूँह बंद हो जाएगा. 2014 में पीएम मोदी कि सरकार आई. यहाँ 2012-2013 (मोदी सरकार से पहले) और 2015-2016 (मोदी सरकार) का डाटा मौजूद है जो आपको साफ़ बताएगा कि भारत 3 साल में ही कितना डिजिटल हो गया है .

मोबाइल बैंकिंग ट्राजैक्शन में बढ़ोतरी
प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) टर्मिनल्स की संख्या पिछले साल नवंबर में जहां 15 लाख थी वहीं अब 27 लाख टर्मिनल्स की मदद से लोग बिना कैश पेमेंट कर रहे हैं. 2012-13 में मोबाइल बैंकिंग ट्राजैक्शन की संख्या 5.3 करोड़ थी तो 2015-16 में 39 करोड़ ट्रांजैक्शन मोबाइल से हुए. पेटीएम, मोबी-क्विक, पे-यू-मनी, फ्रीचार्ज जैसे वॉलेट से ई ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिला है.

कैशलेस बना भारत, डेबिट कार्ड्स संख्या में भी भारी वृद्धि
एटीम इंडस्ट्री को नरेंद्र मोदी की सरकार में काफी प्रोत्साहन भी मिला. मोदी सरकार ने देश में लोगो का बैंक खाता भी खोला और उन्हें डेबिट कार्ड का उपयोग बताया. 2012-13 में डेबिट कार्ड की कुल संख्या 31 करोड़ थी जो अब 55 करोड़ तक पहुंच चुकी है.

डिजिटल ट्रांसेक्शन पर लोगो का विश्वास बढ़ा
2012 में देश में ATMs की कुल संख्या 1 लाख थी, जो 2015 तक बढ़कर 2 लाख हो गई, लेकिन अब इनकी संख्या में इजाफा बंद हो गया है. पिछले छह महीने से ATMs की संख्या में वृद्धि दर्ज नहीं हुई है जिसका मतलब साफ़ है कि लोग डिजिटल ट्रांसेक्शन पर बहुत भरोसा कर रहे है. ये उनको सहूलियत भी देता है. इन सबसे ओवरल ट्रांसेक्शन में एक कमाल का संतुलन बन गया है.

ATM की शुरुआत सबसे पहले लंदन में Barclays bank की थी और इंडिया में यह 1987 में पहुंचा. तब विदेशी बैंको ने भारत के प्रसार के लिए एटीएम का इस्तेमाल शुरू किया था. बाद में HDFC, ICICI और Axis जैसे प्राइवेट बैंकों ने कस्टमर्स को लुभाने के लिए ATM को अपनाना शुरू किया बाद में जब सरकारी बैंकों ने देखा कि इसकी वजह से उनके कस्टमर्स प्राइवेट बैंकों की ओर जा रहे हैं तो उन्होंने भी अपने ग्राहकों को ATM की सुविधा दी.

इस Data ने पिछली सरकार और मोदी सरकार में फर्क दिखा दिया. देश में पहले से ज़्यादा विकास हुआ है. लोगो ने मोदी सरकार की सारी योजनाओं को सराहा है.