बाबरी मस्जिद और अयोध्या के विवाद में न जाने कितने लोगो ने अपनी जान गवाई लेकिन इसका हल अब तक नहीं निकला. इस मंदिर-मस्जिद की लड़ाई अब भारत का इतिहास बन चूका है. इस मंदिर-मस्जिद विवाद में कई क़िस्से और घटनाये ऐसी जुडी है जिनके ज़ख्म भर पाना बेहद ही मुश्किल है.

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लेकिन हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे है जिससे आप बिल्कुल अन्जान होंगे.

दरअसल, शिया वक्फ बोर्ड ने इस मामले की अपील हाई कोर्ट में की थी और उस अपील में कहा था की विवादित जमीन पर राम मंदिर बनना चाहिए और उससे थोड़ी दूर मस्जिद बननी चाहिए. इसके अलावा शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हमारे ऐसा करने से यह रोज़ रोज़ के विवाद थम जायेंगे और सालों से चल रहे धार्मिक विवाद से मुक्ति मिल जाएगी. यह खबर अपने चरम पर है और सोशल मीडिया पर इस खबर ने तूफ़ान मचा दिया है जी हाँ, सोशल मीडिया पर “बाबरी मस्जिद” का नाम ट्रेंड हो रहा है.

बाबरी मस्जिद असल में बाबर की सेना के एक जनरल मीर बाकी ताशकंदी ने बनवायी थी. मीर बाकी “ताशकंद” का रहने वाला था. बाबर ने उसे अवध प्रांत का गवर्नर बना कर भेजा था. कहा जाता है कि पानीपत की लड़ाई में विजय मिलने के बाद सेना ने अवध का रुख किया था  तब बाबर आगरा में ही रुक गया था.

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उसने मीर बाकी को कमान सौंप दी थी. मीर बाकी इस अवसर से इतना खुश हुआ कि उसने इसी ख़ुशी में बाबर के नाम की एक मस्जिद बनवा दी और उसका नाम रखा ‘बाबरी मस्जिद’.

बाबर की जीवनी पर आधारित एक पुस्तक भी लिखी गयी है जिसका नाम ‘बाबरनामा’ है. जिसमें बाबर से जुडी हर छोटी छोटी घटनाओ का जिक्र किया गया है. लेकिन कहीं भी उस पुस्तक में बाबरी मस्जिद का नाम नहीं लिखा है.इससे यही अंदाज़ा लगाया जाता है कि एक मुग़ल बादशाह होने के नाते बाबर को बहुत से तोहफे मिला करते थे जो बाबर के लिए बड़ी बात नहीं थी. शायद इसलिए बाबरनामा में इस मस्जिद का जिक्र नहीं है.